Flood/Disaster Animal Death Compensation 2026 बाढ़/आपदा से पशु मृत्यु पर सहायता अनुदान, राशि और आवेदन प्रक्रिया

Flood/Disaster Animal Death Compensation 2026
Flood/Disaster Animal Death Compensation 2026 बिहार में प्राकृतिक आपदा एवं राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित स्थानीय आपदाओं के कारण पशुपालकों के पशुओं की मृत्यु होने पर सरकार की ओर से सहायता अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। बाढ़, वज्रपात, अग्निकांड, सुखाड़ जैसी परिस्थितियों में पशुओं की मृत्यु होने पर पात्र पशुपालक निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहायता राशि का दावा कर सकते हैं।
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Ritesh Mehta
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Flood/Disaster Animal Death Compensation 2026

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Flood/Disaster Animal Death Compensation 2026: बाढ़/आपदा से पशु मृत्यु पर सहायता अनुदान, राशि और आवेदन प्रक्रिया

Flood/Disaster Animal Death Compensation 2026 बिहार में प्राकृतिक आपदा एवं राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित स्थानीय आपदाओं के कारण पशुपालकों के पशुओं की मृत्यु होने पर सरकार की ओर से सहायता अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। बाढ़, वज्रपात, अग्निकांड, सुखाड़ जैसी परिस्थितियों में पशुओं की मृत्यु होने पर पात्र पशुपालक निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहायता राशि का दावा कर सकते हैं।

इस संबंध में जारी जानकारी के अनुसार पशु मृत्यु के बाद आवेदन, सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया अलग-अलग परिस्थितियों में निर्धारित की गई है। सहायता राशि पशु के प्रकार और निर्धारित सीमा के अनुसार दी जाती है।

Important Details: महत्वपूर्ण जानकारी

विवरण जानकारी
योजना/सहायता बाढ़/आपदा के कारण पशु मृत्यु पर सहायता अनुदान
विभाग डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार सरकार
लाभार्थी प्रभावित पशुपालक
सहायता का आधार प्राकृतिक/अधिसूचित स्थानीय आपदा में पशु की मृत्यु
आवेदन संबंधित पशु चिकित्सा पदाधिकारी/स्थानीय स्तर पर
सत्यापन संबंधित अधिकारी/जांच प्रक्रिया के माध्यम से
भुगतान स्वीकृति के बाद निर्धारित प्रक्रिया से बैंक खाते में
आधिकारिक वेबसाइट state.bihar.gov.in/ahd

किन पशुओं की मृत्यु पर कितनी सहायता मिलेगी?

सरकार द्वारा निर्धारित सहायता अनुदान की दर पशु के प्रकार के अनुसार अलग-अलग है। उपलब्ध सूचना में निम्न दरें बताई गई हैं।

दुधारू पशु

गाय, भैंस, ऊंट, याक, मिथुन आदि दुधारू पशुओं की मृत्यु होने पर ₹37,500 प्रति पशु की सहायता राशि निर्धारित है। इसकी अधिकतम सीमा एक परिवार के 3 पशु तक है।

वहीं बकरी, भेड़ और सूकर जैसे छोटे पशुओं के लिए ₹4,000 प्रति पशु की सहायता राशि निर्धारित है। इसमें एक परिवार के अधिकतम 30 पशु तक की सीमा बताई गई है।

भारवाही पशु

बैल, ऊंट, घोड़ा आदि भारवाही पशुओं की मृत्यु होने पर ₹32,000 प्रति पशु की सहायता राशि निर्धारित है। इसके लिए अधिकतम 3 पशु प्रति परिवार की सीमा है।

बछड़ा/बछड़ा? (सूचना में वर्णित श्रेणी के अनुसार) तथा गधा, टट्टू आदि के लिए ₹20,000 प्रति पशु की दर निर्धारित है और अधिकतम 6 पशु प्रति परिवार तक सहायता का प्रावधान है।

पोल्ट्री

पोल्ट्री के मामले में ₹100 प्रति पक्षी सहायता राशि का प्रावधान है। इसकी अधिकतम सीमा ₹5,000 बताई गई है।

पशु शेड

घर के साथ संलग्न पशु शेड के अग्निकांड में नष्ट होने की स्थिति में ₹3,000 प्रति पशु शेड सहायता राशि निर्धारित है।

सहायता राशि की दर — Quick Table

पशु/क्षति का प्रकार सहायता राशि अधिकतम सीमा
गाय/भैंस/ऊंट/याक/मिथुन आदि ₹37,500 3 पशु तक
बकरी/भेड़/सूकर ₹4,000 30 पशु तक
बैल/ऊंट/घोड़ा आदि ₹32,000 3 पशु तक
बछड़ा/गदहा/गधा/टट्टू आदि ₹20,000 6 पशु तक
पोल्ट्री ₹100 अधिकतम ₹5,000
पशु शेड अग्निकांड ₹3,000 प्रति पशु शेड

पशु मृत्यु के बाद आवेदन कैसे करें?

यदि पशु का शव प्राप्त हो जाए

यदि पशु की मृत्यु के बाद उसका शव उपलब्ध है, तो पशुपालक को सबसे पहले निकटतम पशु चिकित्सा पदाधिकारी को सूचना देनी होगी और निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा।

इसके बाद आवेदन को मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच, पंच या वार्ड सदस्य द्वारा अग्रसारित किया जाना चाहिए। संबंधित पशु चिकित्सा पदाधिकारी आवेदन को अंचलाधिकारी के पास भेजेंगे।

अंचलाधिकारी संबंधित प्रतिवेदन के आधार पर सहायता अनुदान की स्वीकृति के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

यदि पशु का शव प्राप्त नहीं हो

बाढ़ जैसी परिस्थितियों में कई बार पशु की मृत्यु के बाद शव प्राप्त नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में पशुपालक को स्थानीय थाने में पशु क्षति के संबंध में सनहा/प्राथमिकी दर्ज करानी होगी।

इसके बाद सनहा अथवा प्राथमिकी की प्रति संलग्न करते हुए आवेदन अंचलाधिकारी को देना होगा।

अंचलाधिकारी राजस्व कर्मचारी अथवा अन्य संबंधित कर्मी से वास्तविक पशु क्षति का जांचोपरांत सत्यापन कराएंगे। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सहायता अनुदान के लिए कार्रवाई की जाएगी।

जिला स्तर पर सत्यापन

पशु क्षति से संबंधित सूचना अंचलाधिकारी द्वारा समय से जिला पदाधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी। जिला पदाधिकारी आवश्यक जांच-पड़ताल एवं अभिलेख स्वीकृत कराने के बाद घटना के एक सप्ताह के अंदर सहायता अनुदान के भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

अन्य आपदाओं में क्या होगा?

सुखाड़, वज्रपात, अग्निकांड आदि अन्य आपदाओं की स्थिति में भी आवश्यकतानुसार पशुओं की मृत्यु के मामलों का परीक्षण किया जा सकता है।

यदि किसी बड़े क्षेत्र में एक ही स्थान पर एक जैसी परिस्थिति में बड़ी संख्या में पशुओं की मृत्यु होती है, तो रैंडम आधार पर लगभग 5 से 10 प्रतिशत पशुओं/मृत पशुओं का अन्य परीक्षण कर मृत्यु का कारण निर्धारित करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सहायता अनुदान वास्तविक आपदा से हुई पशु क्षति के आधार पर ही दिया जाए।

आवेदन में कौन-कौन सी जानकारी जरूरी है?

आवेदन करते समय पशुपालक को आवश्यक विवरण सही-सही उपलब्ध कराना होगा। जारी सूचना में आवेदन में निम्न जानकारी अंकित करने की बात कही गई है—

  • पशुपालक का नाम
  • पूरा पता
  • मोबाइल नंबर
  • आधार नंबर
  • मृत पशु से संबंधित विवरण
  • पशु की मृत्यु का कारण
  • बैंक खाते का विवरण
  • अन्य आवश्यक दस्तावेज एवं विवरण

गलत या अधूरी जानकारी देने की स्थिति में आवेदन के सत्यापन एवं भुगतान में परेशानी हो सकती है। इसलिए आवेदन जमा करने से पहले सभी विवरणों की अच्छी तरह जांच कर लेना चाहिए।

Important Documents: जरूरी दस्तावेज

दस्तावेज/विवरण आवश्यकता
आवेदन/निर्धारित प्रपत्र आवश्यक
पशुपालक का नाम व पता आवश्यक
मोबाइल नंबर आवश्यक
आधार नंबर आवश्यक
मृत पशु का विवरण आवश्यक
मृत्यु का कारण आवश्यक
बैंक खाता विवरण आवश्यक
शव उपलब्ध होने पर संबंधित सत्यापन नियमानुसार
शव उपलब्ध नहीं होने पर सनहा/प्राथमिकी आवश्यक स्थिति में

सहायता अनुदान में महत्वपूर्ण शर्त

सहायता राशि आर्थिक रूप से उत्पादक पशुओं की वास्तविक क्षति के अनुसार सीमित होगी। इसके अलावा यदि किसी अन्य सरकारी योजना से मिलने वाली सहायता के कारण पशु की मृत्यु अथवा अन्य बीमारी से मृत्यु की स्थिति बनती है, तो संबंधित परिस्थिति में यह सहायता अनुदान देय नहीं हो सकता है।

इसलिए लाभार्थियों को आवेदन करते समय पशु की मृत्यु का वास्तविक कारण और सभी संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से देनी चाहिए।

Important Link: महत्वपूर्ण लिंक

लिंक विवरण
बिहार पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग https://state.bihar.gov.in/ahd
निर्धारित प्रपत्र विभागीय वेबसाइट/जिला पशुपालन कार्यालय से प्राप्त करें
अधिक जानकारी जिला पशुपालन कार्यालय या संबंधित पशु चिकित्सा पदाधिकारी से संपर्क करें

Important Date: महत्वपूर्ण तिथि

विषय तिथि
आवेदन की अंतिम तिथि कोई निश्चित अंतिम तिथि उल्लेखित नहीं
सहायता भुगतान सत्यापन एवं स्वीकृति के बाद
विशेष प्रक्रिया घटना के एक सप्ताह के अंदर भुगतान की प्रक्रिया का उल्लेख

नोट: उपलब्ध विज्ञापन/सूचना में आवेदन की कोई निश्चित अंतिम तिथि नहीं दी गई है। इसलिए प्रभावित पशुपालकों को पशु क्षति होने के बाद जितनी जल्दी संभव हो संबंधित पशु चिकित्सा पदाधिकारी/अंचल कार्यालय से संपर्क करना चाहिए।

कहां से मिलेगी अधिक जानकारी?

इस सहायता अनुदान से संबंधित निर्धारित प्रपत्र, विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया और अन्य जानकारी बिहार सरकार के पशुपालन विभाग की वेबसाइट, जिला पशुपालन कार्यालय तथा संबंधित प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी/पशु चिकित्सा पदाधिकारी के कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।

सूचना में पशुपालन निदेशालय, बिहार, पटना के आपदा कंट्रोल रूम का फोन नंबर 0612-2230942 तथा पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, बिहार, पटना का फोन नंबर 0612-2226049 भी दिया गया है।

हेल्पलाइन / संपर्क

पशुपालन निदेशालय, बिहार, पटना
दूरभाष: 0612-2230942

पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, बिहार, पटना
दूरभाष: 0612-2226049

निष्कर्ष

बाढ़ अथवा अन्य अधिसूचित आपदा के कारण पशुओं की मृत्यु होने पर प्रभावित पशुपालकों के लिए सरकार की ओर से सहायता अनुदान का प्रावधान किया गया है। सहायता की राशि पशु के प्रकार के अनुसार अलग-अलग निर्धारित है और प्रत्येक श्रेणी में प्रति परिवार अधिकतम पशुओं की सीमा भी तय की गई है।

पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि पशु की मृत्यु होने की स्थिति में तत्काल संबंधित पशु चिकित्सा पदाधिकारी, अंचल कार्यालय या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। शव उपलब्ध होने पर निर्धारित प्रक्रिया से आवेदन करें और यदि शव उपलब्ध नहीं है तो स्थानीय थाने में सनहा/प्राथमिकी दर्ज कर उसकी प्रति के साथ आवेदन करें।

महत्वपूर्ण: सहायता राशि प्राप्त करने के लिए पशु की मृत्यु का वास्तविक कारण, पशु का विवरण, पहचान संबंधी जानकारी और बैंक खाते का विवरण सही-सही देना आवश्यक है। अंतिम स्वीकृति संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच एवं सत्यापन के बाद ही की जाएगी।

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